आदरणीय प्रधानमन्त्री जी ,
आज से ठीक दो साल पहले देश में आपकी सरकार बनी थी। और साथ ही निराशा में एक आशा की किरण दिखाई दी थी की अब जल्दी ही भारत अपने पुराने गौरव को प्राप्त करने में सफल होगा जिसका की वह अधिकारी भी है किन्तु विभिन्न कारणों से स्थितियाँ कुछ ठीक नहीं रही है। आपके दो साल के शासन के बाद भी जनता का विश्वास ऐसा हो सकेगा अभी तक कायम है यह हमारे लिए सन्तोष का विषय है।
प्रधानमन्त्री बनने के बाद "मन की बात " के द्वारा जनता के साथ सीधा सम्वाद स्थापित करने में इस कार्यक्रम के द्वारा आपको अभूत पूर्व सफलता मिली है। मैं भी इस कार्यक्रम को सुनने का अवसर कभी भी नहीं गँवाता हूँ और कह सकता हूँ की मैंने आधे से अधिक कार्यक्रम सुने है और फिर उसकी प्रेरणा देने वाली अच्छी बातों की चर्चा भी जनता के बीच की है। आपके इस आग्रह पर की हर किसी को अपनी बात लेकर इस कार्यक्रम के द्वारा आप से सम्वाद का अवसर मिल सकता है, मैं अपनी बात देश की तरफ से आपके पास लेकर आ रहा हूँ। पिछले कुछ दिनों में जिन तीन बातों ने मुझे झकझोरा है उनका जिक्र कर रहा हूँ तथा समाधान के लिए सुझाव दे रहा हूँ।
जात न पूछों साधु की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से मेरा सम्बन्ध करीब पचास वर्षो का है। संघ की एक बात जो हिन्दू समाज को जोड़ने में भी सहायक सिद्ध हुई वह है जाति के बारे में कभी किसी प्रकार की चर्चा न होना और इसलिए थोड़ी देर के लिए ही सही कार्यकर्त्ता मानसिक रूप से जाति -पाती के दायरे से अलग रहता है। मैं मानता हूँ राजनीत में रहकर इस नियम का कड़ाई से पालन शायद संघ कार्यकर्ता के लिए भी व्यहारिक न हो तो भी जिस तरह से अमित शाह ने दलित सन्तो को चिन्हित कर उनके साथ कुम्भ में स्नान करने का आयोजन किया और फिर इसे मीडिया द्वारा प्रचारित किया गया इससे मुझे लगा की हम जिन सिद्धांतों के बल पर अपना स्थान समाज में अलग और श्रेष्ठ बना पाए है उन को तिलाँजलि दे कर राजनीतिक लाभ ले लेने की मन्सा से समाज में ठीक सन्देश नहीं जा रहा है। इस विषय में सोलहवीं शताब्दी में पैदा हुये संत कबीर की बाणी आज भी हमारे लिए मार्ग दर्शन का काम कर रही है
जात ना पूछों साधु की,पूँछ लीजये सब ज्ञान
मोल करो तलवार का , पड़ी रहे दो म्यान।
पाँच के बजाय सात साल की योजना : आजादी के समय देश की योजनाओं को गति देने के लिए जिस योजना आयोग को बनाया गया था उसकी पुनः रचना करके आपकी सरकार ने नीति आयोग बनाया। मुझे नहीं पता की इसकी कार्य पद्धति योजना आयोग से कैसे बेहतर है परन्तु मैं मानता हूँ आप और आप की टीम ने इसकी चिंता जरूर की होगी की नीति आयोग की योजनाये अब ज्यादा व्यहारिक और देश हित में होंगी। पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों की समीक्षा भी सरकार के योजनाकारों ने जरूर की होगी। अब आपकी सरकार ने पाँच वर्षीय योजना को सप्त वर्षीय करने का निर्णय किया है तो यह भी निश्चित रूप से देश हित में ही होगा ऐसा में मान रहा हूँ।
मेरा सोचना है की यदि आपकी सरकार भारत के विकास केलिए सौ वर्षों के बाद का भारत कैसा होना चाहिये इसकी परिकल्पना करे और इस टीम में देश के सभी राजनैतिक दल और विश्व भर के योजनाकार शामिल हो और फिर उस कल्पना को साकार करने के लिए उल्टी तैयारी यानि पचास वर्षो के बाद क्या होना चाहिए पच्चीस वर्षो और फिर उसको साकार करने के लिए सात पांच वर्ष और फिर एक साल की योजना बने तो हमारा प्रयास ज्यादा अच्छा और सही दिशा में हो सकता है। टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसा करना सम्भव है ,इस विषय पर और अधिक चर्चा की जा सकती है। कुछ कठनाइयां राह में आ सकती है लेकिन मुझे लगता है की समाधान निश्चित ही प्राप्त होंगे। और आपकी सरकार देश हित के लिए चिरस्थिाई कार्य करने में सफल होगी।
एक बात और देश हित किसी भी राजनैतिक हित से बड़ा होता है और इसलिए सारी योजनाओं को देश के सार्वभौमिक हित अर्थात लॉन्ग टर्म और शार्ट टर्म में बाँट कर लॉन्ग टर्म में बांटी जाये। सौ वर्ष की योजना निश्चित रूप से लॉन्ग टर्म की योजना का हिस्सा हो तथा एक कानून के द्वारा ऐसा नियम बने की इसको किसी भी सरकार के द्वारा बदलना संभव न हो। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर ,विद्द्युत परियोजनाए ,शिक्षा नीति ,रक्षा परियोजना तथा बड़े निर्माण उद्योग शामिल हो जिनका जीवन चक्र पचास वर्ष या उससे अधिक होता है । ताकि किसी भी राजनैतिक दल की सरकार के आने या जाने से उसकी इच्छा अनुसार यह बदली न जा सके और विनिवेश कर्ता निश्चिंत हो कर लम्बे समय के लिये विनिवेश कर सके और अपनी लागत और मुनाफा की वापसी के लिए कोई भी राजनीतिक पार्टी उसे कानून बना कर उससे वंचित न कर सके। इससे विनेश कर्ता अपना ध्यान अपने काम में लगा सकेगा और राजनैतिक लोगो को खुश रखना उसकी व्यापारिक मज़बूरी नहीं होगी। आपकी सरकार जिस "इज आफ डूइंग बिज़नेस" की बात कर रही है उसकी भी राह ऐसी नीत बनाने से निकलेगी ऐसा मेरा विश्वास है।
बाकी की छोटी छोटी योजनाएं जो राजैनतिक लाभ को ध्यान रख कर बनायीं जाती है उन्हें बना कर उनसे तुरंत राजनैतिक लाभ अन्य पार्टियों के साथ भाजपा को भी लेने दीजिये आखिर यही तो राजनैतिक दलों और राजनैतिक लोगो की दाल रोटी होती है । लेकिन देश हित की योजनाओं का छुद्र राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं की भेट चढ़ जाना देश हित में नहीं है। उदाहरण के लिए फिर कोई सरकार आजाये तो गोल्डन क्वाड्रीलेटरल जैसी देश हित की योजनाएं बंद न हो। जिसका देश की जनता और अर्थ व्यस्था को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
सूखे का समाधान : लगभग एक तिहाई देश सूखे की मार झेल रहा है। फोरी राहत के लिए तुरंत किये जाने वाले प्रयास जो आपकी सरकार कर रही है उनकी मैं सराहना करता हूँ। इस विषय में मेरे दो बिंदु है।
गावों में तालाब ,झील इत्यादि जो पुराने समय से सिंचाई का महत्व पूर्ण हिस्सा थे ज्यादातर स्थानीय लोगो द्वारा या तो कब्ज़ा हो गए है या फिर धीरे धीरे अन्य कारणों से खतम हो गये है। स्थानीय स्तर पर इसका विरोध राजनैतिक और सामाजिक कारणों से हो सकेगा इसकी सम्भावना कम लगती है। मेरा निवेदन है की हर पंचायत को यह निर्देश हो की एक 30X 20 फ़ीट का बोर्ड हर गावँ के बाहर लगे जिसमे उस गावँ के झील ,तालाब ,नदी,जानवरों का चरागाह और गावँ की नो मैन्स लैंड चिन्हित हो और हर गावँ में नवयुवकों की टोली पहले तो यह तय करे की जो बचा है उसे जाने नहीं देंगे और जो कब्ज़ा हो गया है प्रशासन उसे धीरे धीरे तीन से पांच वर्षो में जीवीत करेगा इसका प्रयास करती रहे । इस टोली के लोगो को उत्साहित बनाये रखने के लिए गांव में की जाने वाले दूसरे प्रोजेक्ट्स करवाने में इस टोली के लोगो को प्राथमिकता दी जाएँ। प्रशासन के अधिकारिओं की गोपीनय विवरणी में इसका खास जिक्र हो और प्रमोशन में इसका विशेष योगदान हो ताकि प्रशासन के लोगों का विशेष प्रयास इस के लिए हो ,तो तीन से पाँच वर्षो में गाँव में दूध देने वाले खास कर देशी गायों की संख्या में इजाफा और सूखे की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी और इससे कभी बाढ़ कभी सूखा ,कुछ मैं खाऊँ कुछ तू खा की मनः स्थित बदल सकेगी।
दूसरा महत्व पूर्ण काम यह है की वेदों में दिये हुये ज्ञान जिसकी चर्चा हम समय समय पर अपने भाषणों में तो करते है परन्तु कहने वाले भी उस पर पूरा विश्वास करते है या नहीं कहना मुश्किल है। देश के नवयुवक इस ज्ञान को श्रद्धा से देखे इसके लिए आवश्यक है की इस की वैज्ञानिता को समाज के सामने लाया जाये। भदोई के सांसद श्री वीरेंद्र सिंह ने इसी सत्र में यज्ञ द्वारा वर्षा हो सकती है इस पर एक वक्तव्य दिया है जिसे मिडिया सहित कई लोगो ने अविश्वास पूर्वक स्वीकार किया है। इसका वैज्ञानिक प्रयोग सम्भव है कुछ ज्यादा संसाधान की भी आवश्यकता नहीं। क्या भारत सरकार में वैज्ञानिक प्रकोष्ठ बना कर इसका प्रयोग किया जा सकता है सफल होने पर सूखे से राहत मिलेगी और अगली पीढ़ी की इस ज्ञान में रूचि बढ़ेगी । प्राचीन भारतीय ज्ञान की लोक प्रियता को बढ़ाने और देश का आत्म गौरव वापस लौटे इसमें इस तरह की योजनाएं महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मेरा सुझाव है की आपकी सरकार इसका प्रयास करे तो अच्छा रहेगा।
धन्यवाद।
नमस्कार
अजय सिंह
very important
ReplyDeleteYour message must be reached to PM.
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