Sunday, August 14, 2016

जो तोको कांटा बोयें

जो तोको कांटा बोयें 

प्रिय मोदी जी,
जब आपने पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत के अधिकार की घोषणा की तो पहली  बार लगा की वास्तव में ५६ इंच की छाती का क्या मतलब होता है। आपका बयान सुन कर कइयों की छाती फट गयी और कई का तो दिल बैठ गया। जो बात बहुत पहले की जानी चाहिये वह आजादी की ७०वि वर्षगांठ पर हो रही है। परंतु कभी न आने से देर से ही सही आये  तो। आपको पूरे  देश का समर्थन इस बात पर मिल रहा है। पाकिस्तान से रोज रोज की चिक चिक करने से अच्छा है की एक बार हिसाब साफ हो जाये। गृह मंत्री ने भी कह दिया पाकिस्तान है की मानता नही। यूनाइटेड नेशन ने भी इसे द्विपक्षीय समस्या बता कर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। लोहा पूरा गरम है आपकी कूटनीत सिरे चढ़ने को है। उम्मीद है की अब आप पृथिवी राज चौहान की तरह १६ बार मोहम्मद गोरी को माफ़ नहीं करोगे। बस डर है तो एक ही बात का। कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा की हर के डर से फिर कोई भाजपाई इसे चुनावी जुमला न बता दे। हम तो कहते है :

जो तो कांटा बोये ताहि बोये तू भाला।   वह भी साला  क्या समझेगा पड़ा मर्द से पाला। 

ओलम्पिक में हार 

खेल हो और हार जीत  नहीं हो ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन हार से सबक लेना पड़ेगा। भारत के खिलाड़ियो की ओलम्पिक में हार को देश की चुनोती बनाया जाये। अगले चार सालों में देश के १०० बड़े उद्योगपातियों को यह जिम्मा दे दिया जाये की CSR के  २ प्रतिशत उपयोग खिलाड़ियो को तैयार करने में लगाया जाये। जब कोई उद्योग अपना प्रस्ताव बैंक से अथवा अन्य सरकारी संस्थाओं से ऋण के लिए प्रस्तुत करे तो उसमे तीसरे अथवा चौथे वर्ष जब मुनाफा आने की स्थित बने उसी समय से खिलाडी का पोषण वह व्यापार करेगा यह व्यस्था स्वाभाविक रूप से आनी चाहिये। आइये सुनिश्चित करे कि अब देश में किसी भी खिलाड़ी को अपना तमगा , अपना सम्मान परिवार चलाने के लिए बेचने की जरुरत नहीं पड़ेगी।  अब कोई भी प्रतिभा किसी राजनितिक महत्वाकांक्षा का शिकार नहीं होगी। देश के हर शहर में खेलने की सुविधाएं और खेल कोच उपलब्ध होंगे हम परिवार के व्यक्ति को भरोसा देंगे की यदि परिवार का कोई सदस्य देश के लिए खेलने का व्रत करेंगा  तो देश उन्हें धन और सम्मान की कमी नहीं पड़ेगी।  कर दीजिये एक बार घोषणा आने दीजिये प्रतिभा को सामने। सवा सो करोड़ का देश और हमारी शर्म नाक स्थिति। आइए ७०वि वर्ष गांठ पर भारत माता का गौरव बढ़ने का संकल्प करे केवल सेवा  में नहीं , केवल व्यापार में नहीं  वरन हर क्षेत्र में।  आपका यह संकल्प देश के लिए मार्ग दर्शन का काम करेगा यह विश्वाश है। स्वच्छ्ता अभियान के नतीजे संतोष जनक है इसका भी परिणाम निश्चित ही अच्छा आएगा। 

प्रेरणादाई समाचार

आज सभी समाचार माध्यम १०-२० प्रतिशत समाचार ऐसे दिखाते है जो लोगो के लिए प्रेरणा बने। बाकि के ८० प्रतिशत समाचार जो लोगों को अच्छे लगे दिखाए जाते है। परिणाम समाज का विकृतिकरण। इस विषय पर चर्चा अनेक बार होती है लेकिन  हर बार मुनाफा कमाने की इच्छा समाज को सत्यानाश करने पर भारी पड़ती है। आपने पिछले ३० वर्षो से लंबित जी एस टी बिल पास करवाकर दो चीजे सिद्ध की है। एक आपकी सिस्टम को ठीक करने के लिए सरकार   में इच्छा सकती है और अथक प्रयासों और तमाम मीन  मेख के बाद उनलोगों ने भी इसका समर्थन कर दिया जिन्हें हम यह मान कर चलते है की वह हमारी सरकार अथवा विचार धारा  के जन्म जात  दुश्मन है। दूसरी बात यह की किसी भी विचार धारा का व्यक्ति जब बात अपने लिए ,अपने परिवार के लिये हो तो उसका समर्थन जरूर करेगा यह इस देश की मिटटी की ताकत है सँस्कारो की देन है।  आप की सरकार यदि समाचारों के  का सूत्र बनाये और २० प्रतिशत बिकाऊ ४० प्रतिशत सामाजिक प्रेरणा युक्त,२० प्रतिशत समाचार ऐसे दिखाए की जो सरकार की नीतियों के विषय मे हो उनकी समालोचना करे और उसको बेहतर बनाने के लिए क्या किया जाये उसे बताये मार्ग दर्शन करे और बचे २० प्रतिशत को अपने विवेक के अनुसार इस्तेमाल करे तो बात बन सकती है।  लोग आलोचना करेंगे हो सकता है की तानाशाह भी बताने लगे किन्तु एक बार कड़ा ऑपरेशन आवश्यक है।  आदते ठीक हो जाने पर इसमें छूट  दी जा सकती है। लेकिन कुछ दिनों के लिए कड़ाई आवश्यक है। स्वतन्त्रता की ७०वि वर्ष गाँठ  पर ऐसा संकल्प देश को निश्चित उपहार होगा।

अंतिम बात 
आपके दो ढाई साल के शासन में लोगो को उम्मीद जगी है कुछ बेहतर हो जाने की। आप अपना काम अच्छा कर रहे है। देश ही नहीं विदेशो में बैठे भारतीय और गैर भारतीय लोगो की प्रशंसा भी आपको मिल रही है। आपके ऊपर कोई आरोप नहीं है और आप लोगो के लिए प्रेरणा के श्रोत है। जैसा की होता है  कुछ चापलूसो की बातें,ओछी राजनीत और हरकतें अच्छी बातों का भी प्रभाव काम कर देती है। इस लिये इनके लिए कड़ा सन्देश ही नहीं कड़ी कार्यवाही भी आवश्यक है।  अनावश्यक बोलना केवल राजनैतिक हिट साधने के लिए कुछ भी कहना और करना न तो देश हित में है न ही लंबे समय के लिए पार्टी हित में।  अपने २०१४ का चुनाव इसलिये  जीता की आपकी बात और काम करने की भावना में कोई फर्क नहीं था। बिहार में राजैनतिक कारणों से यह मार्ग आपने और भाजपा ने छोड़ा और बुरी तरह हार गयी। मुझे लगता है यदि आपने वैसा ही दृढ निश्चय और व्यहार किया होता तो भी भाजपा इससे ज्यादा बुरी तरह न हारती हालाकिं में मानता हूँ की जब मन वचन और कर्म एक दिशा में होते है तो भगवान आपके दृढ निश्चय को पूरा करने में मदद करता है और लक्ष्य प्राप्ति निश्चित हो होती है। उत्तर प्रदेश एवं पंजाब के चुनाव का समय पास है यह गलती दोबारा न हो यह प्रयास आपको विजय श्री दिलाएगा ऐसा मेरा विश्वास है। 

जय हिन्द ,जय भारत 

अजय सिंह 
८७- बी ,पॉकेट सी 
सिद्धार्थ एक्सटेंशन ,
नई दिल्ली 110014

 


 

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